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हिंदी कविता में 'रस' क्या होता है?


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 Bolkar सचिन पाठक



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आपका प्रश्न है कि हिंदी कविता में रस क्या होता है तो मैं आपको बता दूं कि किसी भी रचना को पढ़ने देखने जा सुनने पर हमारे मन में जो भी भाव उत्पन्न होते हैं उसे रस कहते हैं किसी भी कविता में मुख्यता किस भाग का गहन तम सबसे गहरा वर्णन होता है उसे उस कविता का रस कहा जाता है रस के ना भेजें सबसे पहले शृंगार शृंगार रस में प्रेम की बात कही जाती है इसका प्रेम होता है यह प्रेम यदि ईश्वर के प्रति हो तो इसे भक्ति रस कहते हैं और यदि शिशु के प्रति हो तो ऐसे बात कर लेगा कहते हैं फिर आता है हास्य रस का स्थाई भाव अर्थात सबसे न्यूनतम या फिर सबसे मुख्य भाग होता है हास्य करुण रस का स्थाई भाव होता है जो वीर रस का स्थाई भाव होता है उत्साह या वीरता रौद्र रस का स्थाई भाव होता है क्रोध भयानक रस का स्थाई भाव होता है भय्या ट विभक्त रस का स्थाई भाव होता है घृणा जी गुप्ता अर्थात भीम शांत रस का स्थाई भाव होता है वैराग्य अर्थात शांति और अंत में अद्भुत रस का स्थाई भाव होता है विश्व में अर्थात हैरानी तो यही रस होते हैं और यह कविता का मुख्य का एक ऐसा भाग है जो किसी भी कविता में होते ही होते हैं मैं आपको उदाहरण के लिए एक कप पंक्ति कह देता हूं जिसमें मैं आपको बताता हूं कि कौन से रस का प्रयोग किया गया है जिसे हम कहते हैं मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई तो यह मीरा का बहुत प्रसिद्ध पद है जो उन्होंने श्रीकृष्ण की भक्ति में लिखा है तो क्योंकि हम देख सकते हैं कि इसमें मीरा का प्रेम बताया गया है श्री कृष्ण के प्रति और यह ईश्वर का प्रेम है इस प्रेम है श्री कृष्ण जो कि ईश्वर है उनके प्रति प्रति है तो इस कारण से यह होता है भक्ति रस श्रृंगार है इसे मुख्यता भक्ति रस्सी कहा जाता है तो अवश्य ही नफरत का वर्णन मैंने आपको दिया और दो होते हैं भेद धन्यवाद
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