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क्या चीन का लद्दाख पर दावे का कोई ऐतिहासिक आधार है?


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 Bolkar Amit singh baghel



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कल लद्दाख पधारे का कोई ऐतिहासिक आजा है लेकिन ऐसा दावा किया है कि गलवान दुखाती है पहले से हमारी वहां भारतीय सैनिक वहां पर उनके रिया में गए थे और इसलिए यह जो झगड़ा हुआ और 20 सैनिकों की शहीदी हमारी भारत की हुई और करीबन 40 40 चीन के सैनिक भी मारे गए और हकीकत यह है कि अगर गलवानो घटी है अगर चीन की है तो उसका चाइनीस नाम होना चाहिए ना और ऐसा तो कोई नाम हुआ है नहीं बलवान घाटी जो है भारतीय प्रवासी संशोधक गोलमा रसूल बलवान के नाम पर वह पहचानी जाती है तीन है चीन ने इसका प्रूफ बिल्कुल खुद गलत दबाव में किया है कि उसकी भूमि गलवान घाटी उनकी एक्चुअली वहां पर कुछ आज टॉप है यानी कि आज पहाड़ जैसे है कि उसमें 1234 पर तो भारत का कब्जा है और 5678 पर चीन का कब्जा है लेकिन वानखेड़े बलवान घाटी और टैंगो मिले वह पास पास में है और गलवान 14000 फीट की ऊंचाई पर है वहां पर माइनस 20 डिग्री टेंपरेचर होता है ऑक्सीजन की वहां पर बहुत कमी होती है और सामान्य पेट्रोलिंग करने में तो कोई प्रॉब्लम नहीं आता है जो वहां के जो सैनिक हैं वह उनको आदत हो जाती है लेकिन अगर कोई मेहनत का काम किया जाए या लड़ने का जरूरत पड़े तो इस वातावरण में बहुत ही तकलीफ का सामना फ्रेंड को को करना पड़ता है इसलिए चीन के पास लद्दाख पर दावे का कोई ऐतिहासिक आधार बिल्कुल नहीं है चीन को जो एक्चुअली जो प्रॉब्लम है वह भारत लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के किनारे किनारे भारत के सड़क बना रहा है जो सड़क द्रमुक से दौलत बेग ओल्डी तक जाती है और यह रखता ऑल वेदर टाइप का है और वहां पर जब बब्बर फरसा होती है उस समय भी यह सड़क चालू रहेगी और चाय बाढ़ आ जाए तो भी वह सड़क टिक सकती यह रास्ते के बीच में गलवान नदी और थोड़ी दूर पर गलवान घाटी आती है यह रिश्ता अगर चीन का कब्जा कर ले तो रास्ते का काम अटक सकता है या तो बुरी तरह से इफेक्ट हो सकता है इसलिए चीन ने गलवान पॉइंट पसंद किया है यह रास्ता भारत के लिए बहुत महत्त्व का है और यह रस्ते पर जो ले से औली तक पहुंचने में अभी 2 दिन लगते हैं और यह रास्ता घर बन जाएगा तो वह काम 6 घंटे में हो सकता है यानी कि 6 घंटे में पहुंचा जा सकता है भारतीय सैनिक हेरा फेरी में भी तेज स्पीड हो सकती है क्योंकि वह दिन पहुंचना और वह 6 घंटे नहीं पहुंचाना रसद जब युद्ध के समय पहुंचा नहीं होती है तो वह सब ट्रांसपोर्टेशन करता है वह घर जाता है इसलिए रोड बनाने के लिए ही यह चीन को प्रॉब्लम है और बलवान भाटी है उसका दवा जो तीन कर रहा है उसका कोई ऐतिहासिक आधार बिल्कुल नहीं है धन्यवाद
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कर दोस्तों मैं आशा करता हूं कि आप इस लोक डाउन के समय में से पहुंच सुरक्षित होंगे तो आज का सवाल है कि लद्दाख पर चीन का कोई दावा या फिर कोई हिस्सा है तो एक गलत बात है लद्दाख जो है भारत का था और पूर्व पूर्व पूर्व में अगर हम लोग बात करें पुराने समय में पौराणिक काल से ही भारत वर्ष हुआ करता था जिसमें अफगानिस्तान पाकिस्तान म्यानमार भूटान और श्रीलंका एक पूरे भारतवर्ष में गिने जाते थे जब उसके टुकड़े हो गए जो अंग्रेजों ने किए उसके बाद से कई चीजें बदल गई लेकिन चीन का यह दावा करना कि उनका है सरासर गलत है और हमारे भारतीय सैनिक जो है उस उन वह जो है चाइना के लोगों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं आशा करता हूं कि आप भी हमारे देश के सैनिकों का मनोबल ऐसे ही बढ़ाते रहेंगे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे ताकि वह हमारी रक्षा में हमारे देश की सुरक्षा में कोई ढील नहीं बरती और उन से ऐसी उम्मीद की भी नहीं जा सकती कि वह दिल भर देंगे क्योंकि भारत मां के सपूत हैं और भारत मां के लिए जान तक देने के लिए तैयार है तो उनसे बड़ा अभी देशभक्त कोई नहीं हो सकता हमें बस इतना करना है कि चाइना के ऐप इस्तेमाल नहीं करने हैं इस बात का खास ध्यान रखना है कोई भी चाइनीस आइटम आज के बाद हम ना खरीदे हां हो सकता है कि भारतीय मूल में बना जो आइटम हो थोड़ा महंगा हो लेकिन आज अगर हम वह महंगी चीज दूर हो जाए ज्यादा दे खरीद लेते हैं तो आने वाले वर्षों में वही चीज आपको बेहतर दामों पर मिलेगी और भारत का भी एक ब्रांड होगा जिस कारण जो है विदेशी लोग भी हमारे भारतीय चीजें खरीद में साबित होंगे और हमारा देश तरक्की करेगा आशा करता हूं कि आप मेरी बात को समझे होंगे और इस पर एक कड़ा रुख क्या फिर कदम उठाएंगे जिससे कि साथ धन्यवाद ध्यान रखिए अपना और अपने परिवार का
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