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एक सामान्य नागरिक देश की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकता है?


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 Bolkar KAUSHAL KUMAR SINGH



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तो सवाल है क्या एक सामान्य नागरिक देश की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकता है तो जब हम देश की अर्थव्यवस्था की बात करते हैं तो उसमें आता है एक जीडीपी जीडीपी यानी जो उस देश में गुड्स एंड सर्विसेज बनती हैं यानी अगर वह व्यक्ति ऑफिस में काम कर रहा है या वह फैक्ट्री में काम करता है तो वह जो कोर्ट जाने को समान बना रहा है या सर्वसिस दे रहा है तो इससे हम आईडी पर पर फर्क पड़ता है एक इंसान से कुछ फर्क नहीं पड़ता यह मैं मानता हूं लेकिन बूंद बूंद से सागर बनता है जब एक एक सामान्य नागरिक देश के लिए अपना कुछ सामान लेना था यह सर्विस प्रोवाइड करता है उससे हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ती है और अगर मैं माथुर स्टार्टअप की तो किसी न किसी ने ऑफिस खोल सकता है तो जब वह ऑफिस खुलता है स्टार्ट खुलता है तो उससे वह ना सिर्फ अपने आप को बल्कि बाकी हजारों लोगों को रोजगार देता है तो जब अर्थव्यवस्था में ज्यादा रोजगार लोग होंगे जब बेरोजगारी का मूवी तुम्हारी अर्थव्यवस्था और अच्छी होगी जब रोजगार बहुत सारे लोग होंगे बेरोजगार की कमी होगी तो इसका मतलब तो यही हुआ कि हमारे देश में ज्यादा गुड्स एंड सर्विसेज ट्रेडिंग सॉन्ग ए तो उससे हमारी अर्थव्यवस्था और अच्छी हो कि तीसरी बात एक सामान्य नागरिक भारतीय चीजों को खरीद कर भी अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकता है बासी चीजों को खरीद कर हम भारतीय भारतीय कंपनियों को बढ़ावा देते हैं जब कंपनी को बढ़ावा देंगे तो और ज्यादा लोगों को रोजगार देगी और ज्यादा रोज लोगों को रोजगार देगी और ज्यादा गुड्स एंड सर्विसेज बनेंगे और ज्यादा गुड्स एंड सर्विसेज बनेंगे तो मैं ड्यूटी पर और बेहतर होगी तो यह क्रोनोलॉजी होती है एक सामान्य नागरिक देश की अर्थव्यवस्था में काफी योगदान दे सकता है धन्यवाद
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सामान्य नागरिक देश की अर्थव्यवस्था में क्या योगदान दे सकता है वह देश की अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं दे सकता लेकिन हां वह अपनी अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकता है और जो भी वह काम करता है अपने लिए अगर पूरी ईमानदारी से करें और अपनी अर्थव्यवस्था को सुधार ले तो देश की जिम्मेदारी एक नागरिक के प्रति कम हो जाएगी यह योगदान उसका बड़ा योगदान की एक व्यक्ति की जिम्मेदारी कम हो जाएगी क्योंकि वह अपनी सभी जिम्मेदारियों को अच्छी सी नात और यही सोच अगर व्यक्तिगत हो एक बड़ी क्रांति आ सकती क्योंकि देश में हर एक व्यक्ति सामान्य नागरिक है हर व्यक्ति है लेकिन हम जो हमारी इसलिए उस पर ध्यान ना दे कर पूरे देश के लिए भटकते रहेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था की तो छोड़ो आपकी भी अर्थव्यवस्था को पता नहीं क्यों कुछ भी नहीं अगर हम अपने देश का एक नागरिक के प्रति जिम्मेदारी जिनको जरूरत है वह इनकी स्थान पर उनकी जरूरतों को पूरा कर सकता है उन जिम्मेदारियों को ले सकता इसलिए हम और यह सोच व्यक्तिगत सबको समान इससे बहुत बड़ी क्रांति आ सकती है देश में अगर सब की पूजा कैसे होती है
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