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जो बीत गई सो बात गई, यह कविता हमें क्या सीखाती हैं?


7 जवाब
   


 Bolkar Shipra



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देखिए जो कहावत है जो बीत गई सो बात गई और बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि लें तो हमेशा पास्ट को बार-बार नहीं दोहराना चाहिए कहते नहीं कि गड़े मुर्दे उठाने से कोई फायदा नहीं है तो कविता या कोई भी कोर्ट से हमें यही सिखाता है कि वर्तमान और फ्यूचर वर्तमान हम जी रहे हैं यह शायद अच्छा ना हो या अच्छा करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन इसका जो इंपैक्ट देखे वह फ्यूचर में दिखेगा फास्ट केवल एक शब्द देख कर देता है पास से हमें कुछ मिलता नहीं है मिलता तो है कि हम आज क्या है क्या कर रहे हैं और कल क्या होंगे कहीं ना कहीं तो दूरगामी इंपैक्ट है वह प्रजेंट से पड़ता है तो यही इसका मतलब है कि हमें हमेशा पिछली घटनाओं को बार-बार नहीं कुरेदना चाहिए और उसको लेकर अपने आप को टेंशन में लेना या इस तरह के फोबिया में या फिर एनएक्स लेना वह बिल्कुल सही नहीं है उससे हम अपने आप को ही चोट पहुंचाते हैं
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जो बीत गई सो बात गई अब पता नहीं मुझे कविता क्या लाइन जैसा लग रहा है कविता तो नहीं लग रही हो सकता है मैं गलत हूं कविता होगी यह कोई और अगर ऐसी कोई कविता है तो जरूर आप मैसेज करूंगा और आप भी कमेंट सेक्शन में बताइए लेकिन इसके अलावा जो लाइन है और अगर एक कविता भी है तो कहीं ना कहीं मर्म तो उसका हर कोई जानता है तो उसके सेंटेंस में ही दिख रहा है जो बीत गई सो बात गई क्योंकि सिंपल सी चीज है कि अगर आप उस ग्रुप में अटके रहेंगे जो भी बीत गया है अगर आप इस चीज में ऐड करेंगे कि मैं ऐसा कर लेता तो ऐसा होता है ऐसा कर लेता तो ऐसा होता तो आप वहीं बैठ कर आ जाएंगे आगे नहीं बढ़ पाएंगे और आगे बढ़ने का तरीका यही है कि भाई आप जो गलती है वह नोट करिए जो आपने सीखा है उसको आगे आप ना दोहराएं मुझे जहां तक यही लगता है कैसा होता
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