क्षितिज़  Bolkar

क्षितिज़



सोने के कलश में विष हो सकता है, और मिट्टी के कलश में अमृत। लेकिन दूर से देखने पर इंसान स्वर्ण कलश को ही चुनेगा। क्योंकि उसे भ्रम है कि जिसमें आकर्षण नहीं उसमें गुण भी नहीं। इस भ्रम में जीने वालों पर दया आनी चाहिए, क्योंकि वो भी एक दिन स्वर्णकलश के मोह में आकर विष को ही अपना लेंगे।

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Author Highlights
  Student

  B.Sc Computer science, dyal singh college morning

  Delhi



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