#जीवन शैली

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1:14
प्रश्न एक इंसान के किस गुण को उसके विरोधियों प्रशंसा कर सकते हैं देखिए विरोधी भी जो इंसान का विरोध करते हैं ना वह कुछ कारणों से करते हैं यह ठीक है बस करते हैं एक स्पर्धा बस करते हैं समझे ना एक स्वाभाविक विरोध भी हो सकता है संजना जाति आधार भी हो सकता राजनीतिक आधार वैचारिक आधार जिसको कह सकते हैं उसके आधार पर लोग एक दूसरे का विरोध करते हैं लेकिन इंसान जो है उसके सदगुण संजना उसके अच्छे गुण हैं जो उसका सदाचरण है उसकी जो इमानदारी है उसकी जो कर्म निष्ठा है उसकी जो धर्म निष्ठा है अपने परिवार के प्रति समर्पण और इमानदारी जो मैंने पहले ही कहा यह कुछ ऐसे मानवीय गुण हैं नैतिक मूल्य जी ने कहा जाता है मानव मूल्य निकाला जाता है इस गुणों से संपन्न जो भी होगा उसकी प्रशंसा उसके दुश्मन भी करेंगे और सही बात है कि कहीं मौका मिलने पर वह कहीं न कहीं उसका गुणगान भी कर लाते हैं गाहे-बगाहे तो यह इंसान की सबसे बड़ी विशेषता है यही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि का आधार भी होता है

#रिश्ते और संबंध

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2:14
ज्यादा शारीरिक संबंध बनाने से क्या नुकसान होता है मैं तो देखें शारीरिक संबंध जो है एक प्राकृतिक आवश्यकता है समझेगा मुझे एक स्वाभाविक प्रक्रिया है संबंध बनाने से क्या होता है कि पति-पत्नी के पीछे लगाओ बढ़ता है समझे ना एक प्रकार का यह मानसिक संतुष्टि का आधार होता है संतानोत्पत्ति कभी एक आधार होता लेकिन अति सर्वत्र वर्जित शारीरिक संबंध बनाने से जोशी में निकलता है समझा अपना पुरस्कार स्त्री को उतना नुकसान नहीं होगा इस तरह शारीरिक संबंधों से इतना ज्यादा परेशान नहीं हो सकती जितना कि पुरुष क्योंकि आपका जो सही में निकलेगा वह आपको कई तरह की कमजोरी दे जाएगा क्योंकि जो उत्तेजना है ब्लड सरकुलेशन है उसके साथ जो आपका ब्लड है उस सब कुछ इसमें एग्जास्ट होगा और इससे फिर क्या होता है कि शरीर में कमी आती है अपना तो बहुत ज्यादा शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए पूर्व में सुना होगा टीवी के जैसे सेंट होते थे वह एक कारण उसका ही होता था शारीरिक संबंध है ज्यादा बनाना तो अपनी अवस्था के अनुसार क्षमता के अनुसार और संतुष्टि के अनुसार शारीरिक संबंध बनाना चाहिए रात में अगर आप शरीर से पूछता है तो थोड़ा ज्यादा कर सकते हैं लेकिन अगर कमजोर है तो यहां भी थोड़ा सा अंकुश लगाना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि प्यार के और भी तरीके हैं केवल शारीरिक संबंध नहीं है तो पति पत्नी आपस में हंसी मजाक करके एक दूसरे के साथ खानपान करके समय नगर के और कामों में दखल देकर के माता-पिता की सेवा करके अपने बच्चों के साथ ऐसा करके टीवी चैनल शादी देख कर के मनोरंजन कर सकते हैं आज शारीरिक संतुष्टि के लिए एक सीमा तक शारीरिक संबंध भी जरूरी है लेकिन एक सीमा से ज्यादा नहीं इससे क्या है कि आपके अंदर कई प्रकार की कमियां धीरे-धीरे स्थापित हो सकती हैं और बाद में आपको यह शारीरिक शिथिलता के रूप में बहुत ज्यादा परेशानी का कारण बन सकती है थैंक

#स्वास्थ्य और योग

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1:08
कतरास में क्या आपने कभी दही चुरा खाया और क्या आप जानते हैं कि कहां खाया जाता है और कब देखें दही चूड़ा तो तुम बार-बार खाया है वह भी पूर्वांचल का रहने वाला हूं अयोध्या के पास का फलादेश मकर संक्रांति के दिन पर एक विशेष भोजन के रूप में बिहार में सेवन किया जाता है तो शुभ माना जाता है समझा अपना अन्यथा नाश्ते के रूप में दही चुरा जो है वह हमारे क्षेत्र में सुबह के टाइम अक्सर जाता है कभी रोटी नहीं बनती है मैं रोटी दही लोग खाते हैं और दही चूड़ा भी खा लेते हैं तो एक विशेष दीजिए त्यौहार का भूत जो हो जाता है इसे राजस्थान में जहां से मैं बोल रहा हूं वह गजक का सेवन जो होता है बहुत ज्यादा होता है और तिल का प्रयोग लगभग मकर संक्रांति के दिन सुबह के समय के नाश्ते में हर चीज में होता है वैसे ही दही चूड़ा भी मकर संक्रांति का विशेष आहार है स्नान करने के बाद भगवान की पूजा दी करके और यह खाए जाते से शुभ माना जाता है

#जीवन शैली

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2:59
बट आपने पूछा रूढ़िवादी सोच क्या होती क्या आप उदाहरण से स्पष्ट कर सकते हैं देखें पहली बार तो सोचा रोड क्या होती है तो रोटी को समझने के लिए समझे समाज जो है अपनी व्यवस्था के लिए कुछ नियम बना था जिसे परंपरा कहते हैं और परंपरा जो स्वाभाविक रूप से प्रचलन में आ जाती है आदमी उसको स्वीकार कर ले तो उसे प्रथा कहते हैं परंपरा और प्रथक प्रथक निर्वाह किया जाता परंपरा सोता है चलती है जैसे लड़कियों की शादी होती है वह विदा होती है यह परंपरा है और शिक्षा से मां-बाप दे देते हैं यह प्रथा है लेकिन प्रथा और परंपरा का निर्वाह बरजोरी करना भी जरूरी है कहते हैं ठीक है ना तो रूडी वह होती है जो परंपरागत मान्यताओं को यह प्रथा जन्मा नेताओं को मजबूरी में संपन्न कराती है समझा अपना आदमी ना चाहते हुए भी ऐसा करता जैसे हिम्मत नहीं है क्षमता नहीं है बेटी की शादी में दहेज दिया जाता है यह रूबी है वहां दहेज प्रथा नहीं है सबसे अच्छा से मां-बाप दे रहे हैं और देते भी हैं लड़की के माता-पिता तो वह प्रथा है और दहेज दिया जाता है परंपरा है समझा अपना लेकिन हमको मजबूरी में देना पड़ेगा हर परिवार बीच कर देना पड़ेगा रूठे तो ऐसी सोच भी कुछ रूढ़िवादी होती है इस समय के साथ बदलती नहीं है समझे ना जैसे कि मकर संक्रांति का दिन आया तो मकर संक्रांति के दिन पर यह होता है कि हमारी सोच यही है परंपरा वादी प्रतिवादी रूढ़िवादी किस दिन हर किसी को स्नान करना चाहिए भगवान की पूजा करनी चाहिए तो लोग क्या करते हैं कि जो बीमार लोग होते हैं ना बीमार लोगों को भी स्नान करा देती छोटा बच्चा है जो जेल नहीं सकता उसे भी स्नान करा देते हैं और फिर वह किसी रोग का शिकार होता उसे सर्दी लगती है और फिर तबीयत ज्यादा खराब होती है तो ऐसी सो मेवाती सोचते होंगे इसी तरीके से जैसे गए घर परिवार की महिलाएं हैं और वह नौकरी में भी चली गई लेकिन उन्हें घुंघट से मुक्ति नहीं मिल रही है या हमारे यहां भी है नगरपालिका के चुनाव में जो सभापति चुनी गई है वह महिला है लेकिन हर जगह सम्मान लेने के लिए पतिदेव टहल रहे हैं और जहां भी उस बेचारी की फोटो आती है घुंघट में आती है और सभापति पत्र लिख रहे हैं अपने आपको या ऐसे ही राजस्थान में सरपंच होते हैं तो महिला अगर स्थित है तो महिला जीत गई तो पति देव या उसके ससुर जी जो है वह सरपंच की कुर्सी पर बैठते हैं और उस महिला के फर्जी सिग्नेचर आदि करते हैं उससे कराते हैं कि यह रूढ़िवादी सोच है इस तरह की समझे अपने जो हमें कहीं ना कहीं हमारी रचना धर्मिता को प्रभावित करती है रूढ़िवादी सोच रही होगी जिस को परिवर्तित हो जाना चाहिए जो हमारे लिए उपाध्याय नहीं है थैंक

#जीवन शैली

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1:31
कप्रस ने बोलकर परिवार को शुभकामनाएं तो आपको भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं मुझे बोलकर पर कुछ प्रश्न मेरे द्वारा कोरा पर पूछे गए प्रश्न लग रहे हैं जो हो वह वही है क्या लोगों द्वारा ऐसा किया जाना उचित आदेश दिया 13035 कर उनकी हमारी आबादी है जिसमें 40 45 करोड़ लोग हिंदी जानते हैं और ऐसे में समता समानता मिल सकती है आपने जो प्रश्न पूछा है वह प्रश्न किसी और के भी मन मस्तिष्क में आ सकता है वह एवं कि वह बहुत शब्द भी वही हो सकते हैं बेटा एक लाइन दो लाइन का ही प्रश्न तो पूछा जाता है तो इसलिए आप अपने दिमाग से बात निकालने जो प्रश्न आपने पूछा किसी ने उसकी नकल की है क्योंकि उससे किसी को फायदा थोड़े होने वाला जवाब देने में थोड़ा बहुत फायदा हो जाता है दो चार पैसे पर आंसर हम लोगों को मिल जाते हैं तो यह अगर किसी ने किया है तो भी अच्छी बात है आपको खुश होना चाहिए कि आपका प्रश्न जो है लोगों को प्रश्न करने के लिए प्रभावित कर रहा है और हो सकता है कि आप जैसी जिज्ञासा उनके मन में भी हूं तो आप जैसे शब्द उन्होंने ले लिया हूं तय करे पे आना आप की सार्थकता हो गई क्या आपकी बात को उन्होंने अपनी बात बना करके प्रस्तुत किया और यही तो जिंदगी है कम दूसरों के काम आ सके इसलिए इसको नेगेटिव मत लिए सकारात्मक दृष्टि से जुड़ी धनात्मक जोड़िए थैंक यू

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1:46
मिट आपका प्रश्न क्या आध्यात्मिक व्यक्ति सांसारिक नहीं होता मेरे विचार से आध्यात्मिकता के प्रथम चरण में तो सांसारिक ता से भी मुक्ति की कोशिश की जाती है लेकिन आध्यात्मिक व्यक्ति से ज्यादा सांसारिक शायद कोई नहीं होता है क्योंकि जब उसे ज्ञान मिल जाता है तो प्राणी मात्र के लिए समर्पित हो जाता है समझे ना मोह माया में फंसे हुए लोगों की भी मदद करता उन्हें संदेश देता निर्देश देता उपदेश देता है अजय गौतम बुद्ध को ले लीजिए महावीर स्वामी को ले लीजिए या किसी और को ले लीजिए ऐसे लोग जो आध्यात्मिकता की पराकाष्ठा पर पहुंच गए जिन्हें भी मुक्ति मिल गई कबीर को ले लीजिए पीछे जाकर के तुलसी को ले लीजिए सर को ले लीजिए तो मेरे विचार से आध्यात्मिक व्यक्ति कहीं ज्यादा सांसारिक होता है और क्योंकि वह सांसारिक मोह माया में फंसे हुए व्यक्तियों को उसे विमुक्त दिला करके और उन्हें संसार की जय जनरल के बंधन से मुक्ति दिलाना चाहता है तो कभी किसी को तो कह देना कबीरा खड़ा बाजार में लिए लो काटी हाथ जो घर जा रहे हैं अपना यह घर क्या है सांसारिक ता है मोह माया है इससे विमुख तो चले हमारे साथ तो भैया आध्यात्मिकता का पहला चरण जो है वह सांसारिक ता से भी मुक्ति का हो सकता है लेकिन अंतिम चरण में आकर के आध्यात्मिक व्यक्ति संसार से जुड़ जाते जैन मुनियों को देखिए सभी मोह माया छोड़ करके जाते हैं लेकिन समाज अपने समाज के साथ जुड़े हुए होते हैं सांसारिक लोगों के साथ जुड़े हुए होते हैं उन्हीं को उपदेश देते हैं तो आध्यात्मिकता सांसारिक ता से अलग नहीं करते बल्कि सांसारिक ता को संवारने और संभालने की चेतना देती है थैंक यू

#रिश्ते और संबंध

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0:56
क्या पत्नी के साथ मारपीट चाहिए बिल्कुल नहीं मित्र किसी भी स्थिति में पूरक होती है हां हो सकती है कि उसका आचरण कुछ गलत हो व्यवहार कुछ गलत हो लेकिन मारपीट करने से उसमें बदलाव आने से रहा मारपीट करेंगे तो कहीं ना कहीं और जिद्दी हो जाएगी क्योंकि मारपीट कब आए एक सीमा तक प्रभावी होता है इसके बाद आदमी बेशर्म हो जाता है निवेदन यही है कि अगर उनकी आदतें गंदी हैं तो उन्हें समझाने की कोशिश करें समझा अपना मारपीट जो है एक बार दो बार काम कर सकती है लेकिन आप बार-बार आकर मारपीट करते हैं तो धीरे-धीरे उनका आचरण वैसा हो जाएगा कि पति क्या करेगा तो डंडे मार लेगा तो थप्पड़ मार लेगा इसलिए इस तरह के व्यवहार से बचना चाहिए और अगर उनमें गलतियां हैं तो उसे सुधारने की कोशिश करनी चाहिए थैंक यू

#जीवन शैली

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1:23
बेटा आपका पर्सनल सोसाइटी में लोग इतना काशिफ क्यों करते हैं तो देखिए क्या है जिंदगी जीने के नजरिया अलग अलग होते हैं अब समाज में एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनके पास केवल समय ही समय होता है अब समय कैसे बिताई जी आपने उस समय को बिताने के लिए अपने अपने जीवन दर्शन का उपयोग करते कोई पूजा पाठ करता कोई डालता है और घर के काम करता है और कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो एक दूसरे के बारे में चर्चा करते हैं तो यह चर्चा जो गपशप आपने गॉसिप कहा है यह चर्चा करने वाले लोग जो है वह दूसरों की अच्छाइयों की कम कमियों की ज्यादा चर्चा करते क्योंकि अच्छाइयों से तूने आनंद मिलता नहीं दूसरों की बुराइयां करने से उन्हें आनंद मिलता है यही कारण है कि किसी भी सोसाइटी में आप चले जाएं तो एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों के मिल जाएगी जो काम तो कर मैं नहीं चाहते हैं आलसी होते हैं कामचोर होते हैं या ऐसे भी होते जिनके पास फालतू का समय होता जैसे रिटायरमेंट से जुड़े हुए जो लोग हैं सेवानिवृत्त जो लोगों को बैठ जाते हैं फिर आसपास की बुराइयों से उनको बड़ा मजा मिलता है इसलिए समाज में किसी भी समाज में कौशिक मिल जाया करते थे

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2:53
बेटा आपका प्रश्न एकल परिवार और संयुक्त परिवार में कोई चार अंतर लिखिए देखिए सबसे बड़ी बात तो यह है पहला अंतर है कि एकल परिवार जो है वह आधुनिकता से जुड़ा हुआ है आधुनिक विचारधारा से जो कहीं ना कहीं हमारी परंपरागत विचारधारा का प्रखंड में शक करती है संयुक्त परिवार हमारी परंपरा से जुड़े हुए हैं अब दूसरा अंतर देखेंगे तो संस्कारों का अंतर होगा आदमी परिवारों के संस्कार जो होंगे वह उपभोक्तावादी होंगे और एकल परिवार के और जैसन जित्तू परिवार होगा उसके संस्कार जो होंगे वह कहीं न कहीं संवेदनशीलता हमारी परंपरागत मान्यता से जुड़े होंगे समझे आप लोग हैं एक दूसरे के प्रति रिस्पेक्ट बहुत ज्यादा होती है तीसरा सदस्य संख्या का अंतर है समझे आप ने एकल परिवार जिसको न्यूक्लियर फैमिली कहते हैं उसमें दो मियां बीवी और ज्यादा जवाब दो बच्चे संजना उनकी दो यहीं तक सीमित होती खाओ पियो और मौज करो एक की संयुक्त परिवार जो होता है वह एक तरह से पूरी फैमिली होती है जिसमें दो तीन चार पीढ़ियों के लोग रहते हैं समझे आपने इसके अलावा महत्वाकांक्षा काफी अंतर होता है एकल परिवार में भी महत्वाकांक्षा होती है और संजय दत्त में भी होती है तथा संयुक्त परिवार की महत्वाकांक्षा जो होती है वह कहीं ना कहीं जमीन से ज्यादा जुड़ी होती है जमीनी हकीकत से कहना माता-पिता चाचा चाची बाबा दादी सब को देख करके महत्वाकांक्षा चलती है और जो एकल परिवार की महत्वाकांक्षा होती है वह कभी-कभी थोड़ा सा देश ले सो जाते कुछ ज्यादा ही महत्वाकांक्षा यहां स्थापित हो जाती है अंतिम इसके बारे में निर्णय लेने का एक अंतर होता है कि कल परिवार में चौकी मियां बीवी रहते हैं तो अच्छे या बुरे दोनों निर्णय जल्दी किए जाते हैं लेकिन संयुक्त परिवार में सब की सूझबूझ से निर्णय लिया जाता है इसमें थोड़ा टाइम लगता है और एक सबसे बड़ी बात जो हमारे संयुक्त परिवार में और एकल परिवार के अंतर में वह निश्चिंत तथा एकल परिवार में निश्चिंत पता नहीं होती है मियां बीवी है नौकरी कर रहे हैं बच्चे नौकरों के सहारे पल रहे हैं लेकिन संयुक्त परिवार में दादा दादी ताई ताऊ चाचा चाची सब रहते हैं और संभाल लेते हैं बच्चों को तो इसी तरीके से घर गृहस्ती समस्त संदर्भ में जो निश्चिंत आता है वह संयुक्त परिवार में कहीं ज्यादा होती है और इससे निश्चिंत अता का जो अभाव है हमारे संस्कारों को भी कहने कहीं तोड़ रहा है और इसीलिए संयुक्त परिवार की तुलना में एकल परिवार स्थापित तो जरूर हो रहे हैं लेकिन जो आपाधापी संस्कारों का विद्रूपता पनमिल्ला है वह इसी के कारण है थैंक यू

#रिश्ते और संबंध

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4:39
कपास में क्या संयुक्त परिवार के टूटने के बजाय एक बहू होती है भी लगाना चाहिए था बेटा एक बहू भी होती संयुक्त परिवार के टूटने की वजह कई कारण हो सकते हैं पिटमैन कारण तो अंध महत्वाकांक्षा हो सकती है जो भाई भाई को बैरी बना देती है समझे आपने एक भाई बहुत अच्छी पोस्ट निकल गया दूसरा छोटी पोस्ट निकला तो उसे अलग होना चाहता है समझे आप ने कमाई के कारण भी जैसे पिता जी बड़े भैया बड़े पिताजी इनकी कमाई का अंतर है इस कारण भी अपने अपने परिवार के लोग अलग करना चाहते हैं पहले कि वह त्याग तपस्या खत्म हो गई समझे आप ना और वह संस्कार जो रहे हो खत्म हो गई जो बड़े बुजुर्गों के सामने हम शेर नहीं उठाते थे अब तो 8:00 10 साल का बेटा भी बाबा जी को तो छोड़ी अपने पिताजी को उल्टी-सीधी कहता है बाबा जी को कहता है किसी के साथ कोई भी शब्द का प्रयोग कर सकता है और अपनी महत्वाकांक्षा के लिए किसी भी हद तक उतर सकता है तो मेहनत उपभोक्तावादी संस्कृति में कहूंगा जो पैसे के पीछे लोग भाग रहे हैं और इसका कारण जो है वह परिवार के सदस्य सभी भाई भी हो सकते हैं पिता के भाई हो सकते हैं जैसे चाचा जी कभी-कभी बाबा आज भी हो सकते जो अपने अपने बच्चों को अलग अलग करना चाहते हैं उसी में कारण बहू में भी हो सकती हैं कि जो बहू यह देख तीर मेरा पति ज्यादा कमा रहा है वह कम कमाने वाले भाई से अपने को अलग करना चाहती है और कहीं ना कहीं अभी कल परिवार की मानसिकता जो पड़ रही है उसके और भी कारण आप ले लीजिए जैसे नौकरीपेशा लोग जो हैं तो नौकरीपेशा लोग जो हैं वह अपना मैं अपने दूरी के अनुसार अपना अलग घर बसाना चाहते जैसे एक भाई दिल्ली में लग गया एक कोलकाता में लग गया है मुंबई में लग गया उत्तर आया है मिलना जुलना उनका कम हो पाता है समझे आप ने भले ही अब यात्रा के संसाधन कितने भी सशक्त हो गए हो तगड़ी हो गए हो पहले की तुलना में गाड़ियां तेज चलने लगी है लेकिन आदमी के अंदर वह मिलने की जो ख्वाहिशें होते थे ना वह दम तोड़ चुके हैं और दूसरा 1 लोग अब कहीं ना कहीं अपना एक छोटा सा प्लाट बनाना चाहता हूं उस में रहना चाहते मैं अपने मकान मालिक बन कर के तो ऐसे में फिर जब अपना घर बसा लेते हैं तो उसको छोड़ना बड़ा मुश्किल होता दो-चार दिन के लिए भी और ऐसे में धीरे धीरे धीरे धीरे बांधने वाली जो दूर होती है प्यार की एकजुटता क्यों खत्म हो जाती है और यही कारण है कि अब संयुक्त परिवार एकल परिवार में बदलने हैं और दुर्भाग्य कि कल परिवार में भी पति पत्नी जो है वह अगर दोनों नौकरीपेशा हैं तो उनमें भी नहीं पढ़ पा रही है इनके अब तलाक के मामले में भारत में बहुत ज्यादा हो रहे हैं जहां लिव इन रिलेशन ऐसी बातें आ गई जान तलाक जैसी बातें आ गई जहां पति पत्नी के बीच में बच्चों को लेकर के बातें आ गई अब यह जो है धीरे धीरे धीरे धीरे प्रवृति बढ़ती जा रही है और आदमी अब संयुक्त परिवार तो छोड़िए अपने निजी परिवार के लिए भी त्याग नहीं करना चाहता बीवी अपने हस्बैंड के लिए हस्बैंड अपनी बीवी के लिए बच्चों के लिए कोई त्याग नहीं करना चाहते सब अपना केवल फ्यूचर देख रहे हैं अपनी महत्वाकांक्षा देख रहे हैं बाकी सब भाड़ में जाए और उस महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए किनौनी सीखे नानी गतिविधियां भी की जा रही हैं अब पढ़ना चाहें तो बहुत सी कहानियां जो है इसी बात पर लिखी गई चाय पीता कहानी को पढ़ लीजिए चाय वापसी कहानी को पढ़ लीजिए चाय चीफ की दावत पढ़ लीजिए हिंदी में ऐसी कहानियां इसी बात का संकेत देती हैं कि कहीं न कहीं हमारे अंदर का जो लगाव था उसका रिश्ता विखंडित हो रहा और इसके लिए केवल बहू को जिम्मेदार ठहराना मेरे विचार से उचित नहीं होगा एक कारण हो सकती है लेकिन अगर बेटे ही अच्छे हो तो फिर वो भी उन्हें कहां तक अपने जाल में फंसा सकती हैं समझे आपने एक बार परंपरा चल जाए बेटे सशक्त हो जाए तो बहू में कहीं न कहीं सिर झुका देंगे वह बहकावे में क्यों आ जाती है उनके बेटों में बेटा क्यों आ जाता है यह बात थोड़ी सी सोचने की है तो उपभोक्तावादी संस्कृति खाओ पियो मौज करो इसके लिए मेन कारण मानी जा सकती है और जिस पर भी प्रभावी हो गई वहीं इसका जिम्मेदार है थैंक यू

#साहित्य

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शिक्षण-कार्य, कालेज शिक्षा में प्राचार्य हूँ
1:37
क्या गलती है जो अक्सर नवोदित लेखकों पन्या से लिखते हुए करते बैठे देखना जो परीक्षा के बराबर के अपना घटनाओं को एक दूसरे से समायोजित करना समझे आपने और काफी समय तक उसे अपने दृष्टि में बनाए रखना बड़ा मुश्किल होता है उपन्यास में तो घटनाक्रम जो है वह समायोजित होना चाहिए चरित्रों का भरपूर विकास होना चाहिए जो जिसके अनुरूपा बनाना चाह रहे हैं होता क्या है कि नए जो लेखक होते हैं वह तारतम में नहीं बिठा पाते हैं एक तो कभी विवरण में ज्यादा तो कभी वर्णन में ज्यादा कभी भाव में ज्यादा कर विचार में ज्यादा कभी घटनाओं पर ज्यादा तो कभी चरित पर ज्यादा कभी पापड़ ज्यादा कोई विचार पर ज्यादा सर जी आप में और लिखने के बाद पकड़ में आती है इसीलिए उपन्यास लेखन के लिए एक लंबा नमो चाहिए ऐसे आपने की परिपक्व लेखक अपने पहले उपन्यास में भी व्यवस्था दे सकते हैं लेकिन नवोदित लेखन के लिए बड़ा आसान लेकिन धीरे-धीरे जब हो जाता तो अपने आप सामंजस्य बैठा लेता है लेखक को यही चाहिए कि वह अपनी अपनी रचना पूरी कर ले तो प्रेमचंद की तरह स्वयं पढ़े और पढ़ करके उसे दोबारा लिखे जो चीजें अपना स्वयं आलोचक बने और उसको जो उचित अनुचित लोगों में एडजस्टमेंट कर

#धर्म और ज्योतिषी

bolkar speakerराजा जनक कहां पर रहते थे?
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0:31
राजा जनक कहां पर रहते थे राजा जनक वर्तमान जो बिहार है उसके मिथिला प्रदेश के राजा थे आपने और उसे राजपूत होते हुए भी ऋषि धर्म के पालन के लिए मशहूर है एअरलिफ्ट भाव से उन्हें जीवन जिया पारिवारिक जीवन जिया निर्लिप्त भाव से और उनकी जो राजधानी थी उन्हीं के नाम पर उसे जनकपुरी कहा जाता है तो मिथिला चित्र के जनक पुरी के राजा थे थैंक यू

#टेक्नोलॉजी

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1:31
चक लैपटॉप और कंप्यूटर में कौन ज्यादा उपयोगी देखे लैपटॉप क्या है कंप्यूटर का संक्षिप्त रूप है आजकल भागदौड़ की जिंदगी में लैपटॉप जो है आप कहीं भी ले जा सकते हैं या अपने कंप्यूटर को एक निश्चित जगह रखना पड़ता है वजन भी ज्यादा होता है समझे आप ने भले ही आज उसका जो स्क्रीन है वह बहुत हल्का हो गया है लेकिन सीपीयू यूपीएस माउस आज के लिए थोड़ी सी जगह चाहिए समझा अपना और उसको पावर सप्लाई भी चाहिए लैपटॉप जो है आराम से आप कहीं भी ले जा सकते हैं 22 दिनों से भी कम वजन के आते हैं डेढ़ 2 किलो में अच्छे लैपटॉप आते हैं और उसका आप ट्रेन में बस में जहां जगह मिली अपने पैरों पर रखकर के उपयोग कर सकते हैं अपना तो आज जो है लैपटॉप कहीं ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो रहा लेकिन अस्थाई तौर पर कहीं बैठकर के काम करना हो तो लैपटॉप की तुलना में फिर कंप्यूटर कहीं यादव फायदे होता है क्योंकि मैं एक जगह फिक्स कर दिया जाता उस पूरा सिस्टम सुनैना जिसमें उसका प्रिंट अभी होता है और फोटोस्टेट की भी व्यवस्था होती है समय आपने तो वहां कंप्यूटर जाधव पर दिए होता आप समाज के लिए लेकिन हां इधर से उधर अगर कोई काम करना है जाना है आना है तो उसके लिए अभी भी लैपटॉप का कोई जवाब नहीं तो लैपटॉप अपनी जगह कंप्यूटर अपनी जगह लेकिन अगर तुलनात्मक हैं तो आज लैपटॉप का जो प्रयोग है वह कहीं ज्यादा टेबल से दोहरा थैंक यू

#स्वास्थ्य और योग

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0:53
घुमा सके क्यों नहीं पहनाने चाहिए बताओ किसने कहा मांस नहीं पहना नीचे यहां बहुत छोटे बच्चे जो हैं उनके लिए जो है थोड़ा सांस लेने में कठिनाई हो सकती है और ज्यादा किसी के संपर्क में नहीं आता इसलिए उन्हें मास्क नहीं बनाना चाहिए लेकिन मेरा यह मानना है कि अगर वह तो शादी कपड़े का और पतला मास्को हो तो छोटे बच्चों को भी बनाया जा सकता है और मेरा बेटी का बेटा रहा है तो सालभर कड़ा तमाशा आसानी से बाहर जाता था तो यूज़ करता था हां घर में आने के बाद से मिठाई जात करके मांस कांटा देते थे और जयपुर स्वस्थ रहो और अपने घर गया लोड करके तो बस एक सांस लेने की प्रॉब्लम हो सकती छोटे बच्चों को इसलिए महासके नहीं पहनना चाहिए और पहनाना चाहिए तो बड़ी सावधानी से थैंक यू

#स्वास्थ्य और योग

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0:59
बिना जिम जाए अच्छा शरीर बनाए जा सकते क्यों नहीं मित्र जिनमें वह जो शारीरिक परिश्रम आप करते हैं ग्रामीण परिवेश में आपको ही परिश्रम करते हैं अगर घर के काम आप करते हैं चारा काटते हैं वह जाटों के ले आते हैं समझे आपने तो गुस्सा लिरिक्स हम ही दिन का एक धर्म है जब उसका एक मॉडर्न रूप है तो बिना जिम जाए भी अच्छा शरीर बनाया जा सकता हां थोड़ा सही खान-पान पर ध्यान होना चाहिए और जिम में थोड़ा क्योंकि वहां जब जाते हैं तो जो उसका संचालक होता है आपको थोड़ा ट्रेन करता है जानकारियां देता है तो आपको अपने ग्रामीण जीवन में भी यह सामान्य जीवन में भी थोड़ा सा योगा है और इसके साथ जो कसरत आदि है वह थोड़ा साथ करना तो निश्चित रूप से आप अपने शरीर को मेंटेन कर सकता हूं पहलवानी है तो इसका एक सबसे अच्छा तरीका पहलवान जो है ना जम जम गई भी अपने शरीर को मेंटेन कर लेते हैं थैंक यू

#स्वास्थ्य और योग

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आपका प्रश्न गर्मी की गर्मी में किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए तो देखे गर्मी में है शरीर जो होता है उसके लिए सबसे सूटेबल कपड़ा जुड़ा काटने का होता है सूती कपड़ा अगर आप उसे यूज कर सके और उसे रख सके ठीक है ना और उस सूती कपड़े में हल्ला को महंगा पड़ता है अगर सारे रंग के हो तो ज्यादा गहरे रंग के कपड़े गर्मी में दुखद होते हैं तो उम्मीद है उत्तर आपको पसंद आएगा टाइम

#जीवन शैली

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1:54
बेटा आपका प्रश्न क्या हमारे जीवन का आधार प्रकृति है क्या तो देखिए हम लोग प्रकृति पर ही निर्भर है किसी भी जीवन का आधार प्रकृति है पानी चाहिए हवा चाहिए भोजन चाहिए प्रकृति से ही हमें मिलता है समझा अपने प्राकृतिक अब परिवर्तन जो है वह हमारे जीवन को परिवर्तित करता है और प्रकृति से कट करके हम जीना चाहे तो असंभव है समझे आपने इसी प्रकृति में 78 किलोमीटर अगर हम ऊपर चले जाएं तो मेरे लिए सांस लेना परेशानी हो जाएगी और फिर देखेंगे प्रकृति का जरा सा परिवर्तन क्या गुल खिला देता है कभी गर्मी कभी सर्दी कभी बरसा मनुष्य का जीवन उसके अनुरूप परिवर्तित होता है अन्यथा प्रकृति के विरुद्ध चल करके उसे जीत नहीं सकते हैं अपना बचाव तो कर सकते नदियों के पुल बना करके गर्मी के दिनों में पंखा चला कर के ही चला करके नहा कर के पानी में रूप करके जाड़े के दिनों में आग जला कर के अगर गर्म कपड़े पहन कर के हम अपने बचाव कर लेते हैं मकान बना करके बरसात से बचाव कर लेते हैं लेकिन प्रकृति के बिना हमारा जीवन असंभव है चाहे वह इसीलिए तो मतलब प्रदूषण में लोग परेशान हो रहे हैं चाय वाय प्रदूषण चाय जल प्रदूषणाचे भूमि प्रदूषण और समझाना ध्वनि प्रदूषण हो रेडियोधर्मी प्रदूषण क्या है यह प्रकृति को छेड़ने का नतीजा है और इससे हमारा जीवन भी सख्त होता चला जा रहा है तो निश्चित रूप से हमारे जीवन का मूल आधार प्रकृति है जन्मदिन पर लेते हैं और मृत्यु प्रकृति के प्रांगण में होता थैंक यू

#स्वास्थ्य और योग

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1:49
बट आपका प्रश्न कौन से बर्तन में पानी पीना हर व्यक्ति के लिए लाभदायक होता देखें पुरानी मान्यता के अनुसार तो तांबे का बर्तन सबसे छोटे भाई माना जाता था लेकिन साथ 8 घंटे तक पानी को तांबे के बर्तन में रखा जाए और विशेषकर तो धरती से ऊपर है धरती से टच पर नारद कहते हैं पानी पूरे फायदेमंद होता है लेकिन दूसरी तरफ कि अगर आप कौन सा रहेगा कैंसर है या लीवर की कोई परेशानी है या एसिडिटी है तो इस पानी से बचना चाहिए या अपना डॉक्टर से संपर्क करके इसका सेवन करें दूसरा यह भी ध्यान रखे थे मिट्टी के बर्तन में भी पानी पीना अच्छा माना जाता है समझे आपने वह आज आरो का पानी जो लोग पी रहे हैं आरोप पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों को उसमें से निकाल दे रहा है तो अच्छे जो मिट्टी के बर्तन है और पानी का गर्मी के दिनों में भी ठंडा रहता है और कहीं ना कहीं वह देखे तो उसमें स्वाद भी आता है आजकल चाय आज की दुकानों पर आप देखें तो मिट्टी के कुल्हड़ बड़ी तेजी से प्रयुक्त होने लगे हैं और एक अच्छी बात है क्योंकि इस समय फायदा भी हो रहा है और बहुत से गरीबों को रोजी भी मिल रही है तो यह चीज तो मेरे विचार से या तो तांबे के बर्तन में पानी पिए या फिर मिट्टी के बर्तन में रखकर के पानी पिए लेकिन यह भी ध्यान रखें कि तांबे के बर्तन में एसिडिटी से जुड़ी हुई जो चीजें इस टाइप की है हम लोग खाने की कोशिश न करें और नुकसानदेह होता है तो कल पानी पीने के लिए तांबे का बर्तन का प्रयोग करें और विशेष रोग अगर आपको है तो बचने की कोशिश करें

#अंतर्राष्ट्रीय

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1:49
आपका प्रश्न है कि क्या भारत कभी आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बन सकता है जो तुम्हारे पास में रहता है तो भारत बन सकता है अमेरिका रूस संसार में हमेशा सर्वश्रेष्ठ नहीं थे समझा अपना पिछले 500 सालों में ही यह लोग आगे आए हैं विशेषकर के साथ शताब्दी दो शताब्दी में महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है विचलन आता है उत्थान के बाद पतन और पतन के बाद उत्थान भारत भी महाशक्ति बन सकता है आर्थिक दृष्टि से और सैनी सदस्य उसके लिए जरूरी बस यही है कि भारत में फिलहाल जो विसंगतियां हैं उन्हें दूर किया जाए आपने अभी मोदी जी संभालने की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन विपक्ष टांग खींचने के सिवा रचनात्मक दृष्टिकोण का परिचय नहीं दे रहा है अगर यह सभी धर्मी बनकर के चले एकजुट होकर के चले और जो गलत लोग हैं उन्हें थोड़ा सा कुचल दिया जाए तो भारत क्यों नहीं आती कॉलोनी महाशक्ति बन सकता निश्चित बन सकता है और संभावनाएं प्रबल है आशावादी का तो हमारी जन्मजात विशेषता है और कभी हम विश्व गुरु थे समय आप ना थोड़ा सा बस अपनी विसंगतियों को सुधार लें तो वह समय आ सकता है और हमारे पास इतनी जनसंख्या है कि उस के बल पर हम अपने उपकरणों का सेंड उपकरणों का भरपूर प्रयोग कर सकते हैं और हमारे देश में इतने संसाधन हैं कि व्यापार आज की दृष्टि से हम एक बार पुनः संसार में सब सिस्टम बन सकते हैं थैंक यू

#खाना खज़ाना

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1:24
कृष्णा के सूजी की पंजीरी बनाने की विधि क्या है अभी की एक तरह से आंखें एसओजी को घी में भूनकर के जो भगवान का कथा होती भगवान की सत्यनारायण की कथा आदि या ऐसे कोई कार्यक्रम उसमें बांटी जाती है तो अगर सूजी का बनाना है तो किसी खुली कढ़ाई में जो थोड़ी चोरी हो खुले पर्दे के उसमें भी डाल कर के और धीरे-धीरे सूची को उस में फूल नहीं है संजय ने लगभग लोगों को मानकर चलें कि 1 किलो सूजी को भूलने के लिए दिल से 200 ग्राम घी चाहिए और बोलते बोलते तब तक उसको बोलते रहिए हल्की आंच में इतना क्यों ब्राउन कलर की ना हो जाए या अपने लव लव जैसे सूजी का हलवा बनाते समय सूची में पानी डालने की स्थिति आती है उतनी बुनाई उसकी करें उसके बाद उसको वहां से हटा दें ठंडा होने काफी कुछ ठंडा हो जाए तो या तो उसमें पतली रवि की चीनी है जिसको बुरा बोलते हैं हालांकि बुरा तो नहीं उतना सूटेबल होगा लेकिन चीनी अगर पत्नी रवि की है तो ज्यादा अच्छी होती तो पतले रवि तो समझी नहीं डालते और साथ ही उसमें अगर आपके पास सूखे मेवा आती है तो उसको डाल दें सब्जी स्वादिष्ट और अच्छी बन जाती है थैंक यू

#पढ़ाई लिखाई

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1:57
प्रश्न 51 सोलर पैनल यूज कर सकते क्यों नहीं कर सकते लोग कर रहे हैं तो आप भी कर सकते हैं बस यह ध्यान रखें कि इस सोलर पहनी है जब खरीदी है तो किसी अच्छे एक कंपनी का और अच्छे एजेंट से खरीदी इसमें है क्या है कि धोखाधड़ी बहुत है और है मैंने स्वयं खरीदा है और 5 किलो वाट का लेकिन मेरे साथ धोखा हुआ इसका जो कन्वर्ट वर्ड है जो बैटरी को चार्ज करा कर क्यों रात में भी लाइट देता है वह पैनल मेरे को धोखे से दिया गया है समझा आपने तो उसमें अगर आप पर एक ही कंपनी का सारा बोले किसी विश्वासपात्र से ले तो सोलर पैनल यूज कर सकते हैं बस थोड़ा सा ध्यान रखें कि जब इसमें बादल होता है या मौसम थोड़ा सा खराब होता है तो इसकी चार्जिंग जो होती थोड़ी कम होती है तो अगर आप पूरा सिस्टम खरीदते हैं कि 4 दिन भी लेते हैं इनवर्टर भी लेते और बैटरी भी लेते हैं तो बस यह समझ है कि खराब मौसम में बैटरी का थोड़ा कम उपयोग करिए अन्यथा जहां बिजली की उपलब्धता नहीं है या बिजली समय से नहीं आती है वहां यह बहुत ही प्रभावी सिद्ध होता है और मात्र 10 12000 का पैनल जो है आपके एक कमरे के लिए पर्याप्त लाइट दे सकता है पंखा भी छोटा चला सकता है और बिजली के बिल से तो आपको हमेशा सुरक्षित रखेगा ही और नियमित भी बिजली दे सकता बस थोड़ा सा जब मौसम खराब होता है तो इसकी पावर कमजोर हो जाती है अन्यथा एक बार पैनल लगवा लेने पर 500 साल तक आप आराम से इसका उपयोग कर सकते हैं थोड़ा सा बस उसको पूछना पहुंचना है रखरखाव का भी खर्च नहीं है बैटरी पर कभी-कभी खर्चा जाता है थैंक यू

#जीवन शैली

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1:30
मीत और हिम्मत में कितना फर्क है प्रश्न आपका है या मेरे विचार से दोनों में विशेष फर्क नहीं है बस उम्मीद जो है व्यक्ति की कल्पनाशीलता समझे यह सोच का वह पक्षी है जो आशावादी होता है समझे ना और हिम्मत उसी सोचकर वह प्रतिफल है जो उसे कर्म करने की प्रेरणा देता है समझे ना तो हिम्मत भी अगर की जाती है तो उम्मीद से ही की जाती है और उम्मीद होती है तभी हिम्मत सक्रिय होती है लेकिन हां उम्मीद आशावादी तक का वह रूप है जो काल्पनिक है मन कल्पना कर लेता है कि हम ऐसा कर सकते हैं आशावादी था लेकिन जब वही मन तन मन को उसके लिए मनसा वाचा कर्मणा प्रेरित कर देता है कि करो या मरो तो हिम्मत का प्रतिफल होता है मेरे विचार से दोनों एक दूसरे के पूरक हैं हिम्मत बिना उम्मीद के नहीं हो सकती है और उम्मीद तभी सक्रिय होती है जब आदमी के पास है हिम्मत होती है समझा अपना इसीलिए दोनों में चोली दामन का संबंध है केवल उम्मीद न तो व्यक्ति को सफल बना सकती है और न केवल हिम्मत जिसके पास उम्मीद भी हो रहमत भी है तभी दोनों का सहयोग जो है व्यक्ति को सफलतापूर्वक किया करता था

#पढ़ाई लिखाई

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3:32
स्टाफ का प्रश्न है क्या आप उस व्यक्ति को क्या सलाह देंगे जो अपनी पहली नौकरी करने जा रहा है कि पहली बात तो मानसिक रूप से तैयार रहिए अच्छी वीडियो घोड़े के लिए भेजना क्योंकि वहां मिलने वाले सभी साथी आपके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करें जरूरी नहीं है समझे अपना कुछ दुष्ट प्रवृति के लोग नहीं हो सकते हैं तो एक तो थोड़ा सा अपने मन को कंट्रोल में करें धन्यवाद रखें जल्दी बाजी में कोई कदम ना हो नंबर दो अपने सारे डाक्यूमेंट्स जो है हो सकता वहां एक बार आपको जमा करनी पड़े तो सारे डाक्यूमेंट्स एक बार आप इकट्ठा करके अपने पास रखने और उनकी एक फोटो प्रतीत होती है जिसमें 10वीं की मार्कशीट में 12वीं की मार्कशीट अप्वाइंटमेंट लेटर आया का चिकित्सा प्रमाणपत्र मांगा गया तो वह है आधार कार्ड है पासबुक की फोटो कॉपी भी मांगी जाती है तो करैक्टर सर्टिफिकेट और मेडिकल माना गया तो मेडिकल आदि जो कागजात है उस सब विधिवत भर कर के ले जाए समझे ना और यूनिफॉर्म भी उसका कोई निश्चित यूनिफार्म है तो कृपया वह यूनिफार्म पहन कर जाएं माली जी उपलब्ध नहीं है तो वह संबंधित अधिकारी आओ चलो हैं उनके सामने निवेदन करके आप काम चला सकते कि महोदय मुझे नाराज हो गया हफ्ते 10 दिन या 5 दिन में मैं मिनिमम बनवा लूंगा तड़पते कपड़े ना पहने समझा अपना थोड़ा रिलैक्स महसूस करते हुए अच्छे कपड़े में आप जाएं और जाकर के जो आप इसका सुपरिंटेंडेंट है विशेषकर के बड़ा बाबू ऑफिस सुपरिंटेंडेंट वरिष्ठ लिपिक उससे मिलने की कोशिश करें समय आपने और अगर बड़े हैं तो मेरे विचार से नमस्कार के साथ पहरा देने में भी कोई प्रॉब्लम नहीं है इससे आपको उनका प्यार मिल सकता है समझे अपना और है फिर उनसे सलाह मांगे फिर अपने अधिकारी के चेंबर में नियम के अनुसार पूछ ले पहले एक बार कोई नौकर आदि हो कौन का मिजाज कैसा है तथा रूप अपने को एडजस्ट करते हुए उनसे मिलने की कोशिश करें और इसके बाद राजेश आपको निर्देश मिलता है वहां बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी मान लीजिए कि आपको कोई ऐसा नाम अचानक दिया जाता है श्याम बाबू के रूप में जा रहे हैं जो आप नहीं जानते हैं तो जिसने टेबल पर आप को दिया गया है वह देखेगी क्या आप कर सकते हैं क्रश तो थोड़ा सा साथियों का सहयोग निधि मित्रता का व्यवहार करिए और निवेदन है कि दो-चार दिन में लोगों को परखने की कोशिश करिए समझाने की कोशिश करिए तन्मयता के साथ उस काम में डूब जाइए जिसके लिए आप की नियुक्ति हुई है तो 400 दिन में बहुत कुछ आप की पकड़ में आ जाएगा अपने पराए कि आप पहचान करने लगेंगे ध्यान रखें कि काम सबको प्यारा लगता है अगर आप काम चोरी नहीं करेंगे तो निश्चित ही सबके चहेते बन जाएगी थैंक यू

#अंतर्राष्ट्रीय

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1:36
वित्त पहली बार जमीन खरीद रहा तो उसे आप उसे क्या सलाह देंगे बेटा देखे सबसे पहली सलात मेरी है उसे जमीन की नकल निकलवा ले और निकल नकल निकलवा कर के संबंधित जो पटवारी या कानूनगो या तहसीलदार साहब उनके कार्यालय से एक बार उस जमीन को सक्रिय करने को जमीन जिससे आप ले रहे हो उसी के नाम है उस पर कोई ठंडा तो नहीं गए आनंद झंझट तो नहीं है और यह जांच लगभग 1950 तक कराने की कोशिश करें समझे अपना और इसके बाद ही देखे को जमीन बिल्कुल बेदाग है और जब उसको लिख पाए तो वह लिख जाते समय यह देश ने किसी का कब्जा हो जा नहीं होना चाहिए और कृपा करके जब लिखवा रहे हैं तो सबसे पहला धान्य रखे की जमीन लिखवाने के बाद ही उसका भुगतान करें गवर्नमेंट से एक बार पता लगा ले कुछ का रेट क्या है समझा अपना और कोशिश करें कि अधिकतम राशि जो है नगद दे क्योंकि जो भी आपको जरूर लिखेगा और निश्चित है कि कुछ राशि आपसे अलग नगद लेगा अगले चेक या वैसे सीधे नहीं देना चाहेगा लेकिन आप कोशिश करें क्या न रिकॉर्ड उसे पैसा दे यहां अपने चेक के द्वारा दे ऑनलाइन दे या ऐसे कुछ दें और लास्ट आपसे निवेदन है कि जमीन जैसे लिखवाई जाए तुरंत ही उसकी रजिस्ट्री अपने नाम कराने के बाद अपने नाम का रिचार्ज करा ले और अगर उसकी बाउंड्री या हदबंदी करा ले तो बहुत अच्छा है थैंक यू

#अंतर्राष्ट्रीय

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0:30
पूछा भारत के भारत के समुद्र का नाम बताइए तो देखे भारत के दक्षिण में जो समुद्र है वह तो हिंद महासागर है ठीक है ना और पूरब में जो है वह बंगाल की खाड़ी है और पश्चिम में अरब सागर है तो अरब सागर बंगाल की खाड़ी और नीचे हिंद महासागर यह दोनों क्रमश नीचे की तरफ जा करके श्रीलंका या कन्याकुमारी का जो वहां जाकर के हिंद महासागर से मिल जाते हैं थैंक यू

#भारत की राजनीती

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0:41
आपने पूछा है कि भारत की राजधानी कहां है भारत की राजधानी वर्तमान में नई दिल्ली है जो अपने आप में केंद्र शासित प्रदेश है जमुना जी के किनारे बसी हुई है और आजादी से पहले से वह भारत की राजधानी के रूप में स्थापित है 7 बार जरूर परिवर्तन की चेष्टा की गई है लेकिन आजाद भारत की राजधानी तो नई दिल्ली ही रही है और उससे पहले भी मुगलों के समय में अंग्रेजों के समय में दिल्ली को राजधानी का ही सौभाग्य मिला बीच में एक आद बार परिवर्तन की चेष्टा जरूर की गई लेकिन जो सफल नहीं हुई थैंक यू

#साहित्य

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1:30
आपका प्रश्न क्या दिनकर की कलम से निकली कुछ सर्वश्रेष्ठ पंक्तियां साझा कर सकते बेटा बहुत बड़ा लेखन है दिनकर का राष्ट्रकवि कहे गए हैं और ऐसे में कुछ पंक्तियां प्रस्तुत करना दिनकर के साथ अन्याय करना होगा कि कुछ पंक्तियां उनकी सर्वश्रेष्ठ कैसे मान ली जाए सिंहासन खाली करो कि जनता आती है समझे ना हो तो आनंद के कवि हैं लेकिन जो उनके उर्वशी रचना है उससे 4 पंक्तियों में अक्सर बोलता रहा हूं मंच पर तो है यह पंक्तियां कि पुरुष के अपने सामर्थ्य और स्त्री की सामर्थ्य स्त्री जिसे पुरुषों का हक है पुष्प से जिसकी तुलना की गई पुरुष जोशी में सेवाएं मिलाकर खेल सकता है इंद्र का युद्ध भी जो झेल सकता है उसके आगे वही असहाय हो जाता और सत्य के रहते हुए निरोप आए हो जाता तो प्रेम का एक अद्भुत प्रतीक याद भूत जो अभिव्यक्ति है वह इन पंक्तियों में हुई है बाकी एक जगह उन्होंने जो लिखा है कि सावधान मनुष्य विद्यालय तलवार तो इसे देश और तस्करी स्मृत के पास ऐसी न जाने कितनी पंक्तियां उन्होंने लिखी हैं और फिर देशभक्ति के संदर्भ में तो कहना क्या थैंक यू

#साहित्य

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1:33
बट आपसे पूछा तुलसीदास जी चित्रकूट से कैसे संबंधित है बेटा ऐसा है कि तुलसीदास का जो मूल निवास है वह चित्रकूट से थोड़ी ही दूर पर है समझे ना तो चित्रकूट तुलसीदास जी इमारत नावली के साथ विवाह करने के बाद सभी आप जब तक गंगा जमुना जी उस पार से रूठ कर के चले तो बहुत दिनों तक हो चित्रकूट में ही छिपे रहे और कहा जाता है कि चित्रकूट में रहते हुए भगवान ने एक बार उन्हें दर्शन भी दिया था जो बार-बार दोहराया जाता चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर एकदम बदलती है लेकिन मैं अब सत्यता तू ही हूं ऊपर वाला जाने या जिन लोगों ने लिखा है मां रत्नावली जो है बाद में इनका पीछा करते हुए चित्रकूट पहुंचती है और महाराजा भगत इनके साथ रहते हैं लेकिन मैं वहां से तुलसीदास चुपके से भाग लेते हैं वह मां इसलिए भी ज्यादा दुखी हूं करके आई थी क्योंकि जो बेटा तुलसीदास उनके पास छोड़ कर के आए थे एक ही बेटा था वह मर चुका था इसलिए मां उनकी शरण में आई थी लेकिन उन्हें भी छोड़कर क्यों भाग गए वहां से तो चित्रकूट का यही संबंधित तुलसीदास से माना जाता है मंदाकिनी नदी के किनारे वह किसी अपने भक्तों की आ रहा करते थे थैंक यू

#पढ़ाई लिखाई

bolkar speakerबीकॉम के बाद क्या करें?
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0:43
बेटा आपने पूछा बीकॉम के बाद क्या करें तभी काम के बाद आप कहीं कुछ कर सकते जिसने मैंने भी यह है सीए है एबी की तैयारी करें सीए की तैयारी करें बैंक के लिए तैयारी करें सभी बैंकों का एक साथ एग्जाम होता है और थोड़ा सागर कंप्यूटर आज की अच्छी ट्रेनिंग ले लेते हैं आप तो फिर टेली आदि के माध्यम से किसी बैंक में भी पार्ट टाइम सर्विस आप कर सकते हैं ठीक है ना एक बार लग जाइए भी काम करके मुझे आपने एमबीए बीबीए है बीसी है बहुत से कोर्स है नंबर अच्छे हैं तो आपके लिए इसे थोड़ा सा कंप्यूटर का नालेज होना चाहिए इसके बाद आप का रास्ता अपने आप खुलता चला जाएगा थैंक यू

#पढ़ाई लिखाई

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1:13
आपका प्रश्न है कि क्या करें अगर लोन देने के बाद भी बैंक एनओसी नाटक जंक्शन सर्टिफिकेट ना देखे पहली बात तो यह है कि आपको लगता का अपनी किस्त जमा कर दी है पूरी लेकिन कभी-कभी को तक है कि फाइनल जब बहन का हिसाब करता है तो आपके ऊपर कुछ देनदारी निकल सकती है से बीच में आपने कोई किक्रेट दिया है या कहीं कोई भूल चूक हो गई है तो सबसे पहले तो आप बैंक के संबंधित है जो डिपार्टमेंट है जो काम करने वाले उनसे बात करिए और उनसे अपने उस्मान का आखिरी सांस आखिरी हिसाब में अगर आपका लोन पूरा चुकता हो जाता है तो निश्चित रूप से आपको इनसे देंगे और मैं मानता हूं कि अगर आप कह रहे हैं और बैंक में खाते से कर्मचारी होते जो दुष्ट पर कितने होते हैं काम को डालते हैं समझे आप ना तो हम बैंक के मैनेजर से मिलने के बाद अधिकारियों को भी सूचित कर सकते लेकिन उससे पहले आपसे आग्रह के एक बार क्लियर कर लें कि आपका जुनून है पूरी तरह से चुकता हो चुका और उसमें कोई देनदारी लेनदार ही नहीं है
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